Hamari Zindagi Mein Dushmano Ka Hona क्यों जरूरी है?
Nasir Husain
Islam Mein Dushman Aur Shaitan Ki Hikmat
कुरआन-ए-अज़ीम में अल्लाह ताआला यूं इरशाद फरमाता है, इसी तरह हमने हर नबी के साथ एक दुश्मन पैदा किया है। शयातीनल इंसि वल जिन्न। इंसान और जिन्नात में से शयातीन। नबियों के साथ एक दुश्मन को बनाया गया है, तो फिर आम इंसान का क्या है? इंसान की ज़िंदगी किसी मुकाबिल में ही गुज़रती है। यानी खैर और शर दोनों इस ज़मीन पर मौजूद हैं। जितने भी औलिया-ए-कामिलिन, सहाबा, ताबेईन जिनकी भी ज़िंदगियां आप देखें, उनके करामात, उनकी अच्छाइयां, उनकी फज़ीलतें सब आप बयान करते हैं, सुनते हैं। लेकिन साथ ही उनकी ज़िंदगी में कोई एक थ्रेड रहता ही है। एक दुश्मन कोई रहता है। इसकी वजह क्या है?
Hazrat Ibrahim Alaihissalam Aur Namrud Ka Waqia
सारे नबियों के साथ अल्लाह ताआला फरमाता है, हमने एक दुश्मन पैदा किया है। वजह यह है कि दुश्मन इसलिए होता है कि अल्लाह के महबूबों की मोहब्बत का इज़हार हो जाए। उनके कमालात का इज़हार हो जाए। मिसाल के तौर पर सैय्यदना इब्राहीम खलीलुल्लाह अलैहिस्सलातु वत्तस्लीम। ये खलील हैं अल्लाह के। बरगुज़ीदा पैगंबर हैं, जलीलुल कद्र नबी हैं। और आप अल्लाह ताआला के महबूब नबियों में से हैं लेकिन आपके साथ जो हुआ, आपको आग में डाला गया। वाकिया आपको मालूम होगा। नमरूद ने आपके लिए आग जलाई और आपको आग में झोंक दिया गया और आग ने आप पर कुछ असर नहीं किया। अल्लाह ताआला ने कुरआन में फरमाया 'कुल्ना या नारू कूनी बरदंव व सलामन अला इब्राहीम'। हमने कह दिया ऐ आग इब्राहीम पर ठंडी हो जा। सलामती वाली हो जा। आग ठंडी हो गई। इब्राहीम अलैहिस्सलाम का कोई भी बाल बांका नहीं हुआ। अब ये जो कमाल इब्राहीम अलैहिस्सलाम का ज़ाहिर हुआ, इसकी वजह क्या है? उस नमरूद का होना। वो दुश्मन इसलिए था कि अल्लाह के नबी के कमाल का इज़हार हो जाए।
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आपकी ज़िंदगियों में भी ये मामलात होंगे। हर एक के साथ कोई ना कोई दुश्मन होगा। कोई ऐसा तसव्वुर नहीं कर सकता कि मैं या फलां सारे दुश्मनों से पाक हैं। और कभी कभार हमारे पास लोग आकर के कहते हैं कि हज़रत फलां मेरे साथ वो कर रहा है, ये कर रहा है, मैं तो किसी का बुरा चाहता ही नहीं। यहां ये कानून नहीं है कि आप किसी का बुरा चाह रहे हैं तभी आपके साथ कुछ बुरा हो रहा है। दुनिया बहुत सारे लोगों से ऐसी भरी हुई है जो खामोश चलने वालों के साथ भी दुश्मनी करती है। उनको ये ज़रूरी नहीं है कि आपने उनका कुछ बिगाड़ा हो। आप रास्ता चलने वाले हों, लेकिन उसके बावजूद भी कुछ लोगों को अच्छा नहीं लगता आपका रास्ता चलना। आप सर झुका कर के चलते हों, ये भी बहुत सारे लोगों के लिए सही नहीं लगता। आप सर उठा के चलते हैं, तो भी लोगों के लिए तकलीफ है। तो ख्वामख्वाह जो तकलीफ है लोगों को, हर एक का कोई ना कोई दुश्मन या छोटा होता है या बड़ा होता है।
Dushman Humein Allah Ke Kareeb Kaise Laate Hain?
लेकिन हमारी ज़िंदगियों में किसी दुश्मन का होना, ये इसलिए नहीं है कि हम सबको खत्म कर दिया जाए, बल्कि इसलिए है कि हम अल्लाह से ज़्यादा करीब हो जाएं। उससे पनाह मांगने लग जाएं। दुश्मन से बचने के लिए रोज़ाना कुछ ना कुछ आप वज़ीफ़ा करते रहेंगे, अल्लाह से दुआ करते रहेंगे। जब जब आप मुसीबतों में गिरफ्तार होते हैं, अल्लाह की तरफ दौड़ कर के आते हैं। और फिर एक बात आपको मैं ये भी बता दूं। अल्लाह की ज़ात पर यकीन और तवक्कुल इतना बढ़ जाता है, हम मुसलमान हैं इस एतबार से मैं कह रहा हूं, दुश्मन चाहे जैसे भी हों, लेकिन मुसलमान ये सोचता है कि मेरे रब से बढ़कर ताकत किसकी है? ये जितना ज़रर पहुंचाने वाले होंगे, ये अपनी ताकत के हिसाब से पहुंचाते हैं, और अल्लाह हिफाज़त करने वाला है, वो अपनी ताकत से हिफाज़त करता है। और कुरआन में अल्लाह ताआला ने फरमाया है, इसलिए हमारा यकीन बढ़ता चला जाता है।
अगर आपका कोई दुश्मन ही ना हो, तो आप खुद ही अपने आप को खुदा समझने लग जाएंगे। अगर कोई आपका दुश्मन ही ना हो, तो आप खुद को ये समझने लग जाएंगे कि मेरा कौन क्या करता है, कुछ भी नहीं मैं सेफ हूं। और जहां पता चला कि कुछ दुश्मन हैं जो ताकतवर भी हैं, या साज़िशी हैं, या जाल बुनने वाले हैं, तो अंदर से एक खौफ पैदा होता है कि मेरी गफलत में कहीं वो मुझ पर हमलावर ना हो जाए, इसलिए बारगाह-ए-रब्बुल इज़्ज़त में रोज़ाना दुआ करता हूं कि मौला इन दुश्मनों से मेरी हिफाज़त फरमा।
मेरे अज़ीज़ों हमारी और तुम्हारी ताकत का क्या कहना। सय्यदुल अंबिया रसूले अकरम सल्लल्लाहु ताआला अलैहि वसल्लम, अल्लाह ताआला के वो महबूब नबी, अगर वो हुक्म दें तो आपके साथ सोने और चांदी के पहाड़ चला करेंगे, हुज़ूर ने खुद फरमाया। लेकिन उसके बावजूद मेरे आका सल्लल्लाहु ताआला अलैहि वसल्लम दुश्मनों के शर से बचने की दुआ करते थे। दुश्मनों के शर से बचने की दुआ करते थे। और बारहा ऐसा देखा भी गया कि दुश्मनों का वार मेरे आका पर हुआ है कि नहीं हुआ? अबू जहल की वजह से... अच्छा यहां पर ये भी मैं बता दूं। अबू जहल क्यों पैदा हुआ? क्यों आ गया हुज़ूर के मुकाबिल में? क्यों इतनी अज़िय्यतें दिया? मेरे अज़ीज़ों अल्लाह ताआला का कोई काम हिकमत से खाली नहीं होता। कोई काम हिकमत से खाली नहीं होता। फेअलुल हकीमी ला यख्लू अनिल हिकमह। अबू जहल के होने की वजह से रसूल-ए-पाक सल्लल्लाहु ताआला अलैहि वसल्लम के कई मोजिज़ात का इज़हार हुआ है। कंकरियों ने कलमा पढ़ा हुज़ूर का ये कमाल देखा दुनिया ने, ये अबू जहल इस तरह का दुश्मन होने की वजह से। उसने इंकार किया और मेरे आका ने इज़हार करके दिखाया। उसने कहा कि ये नबी नहीं हैं, इनका अगर कुछ है तो ज़मीन पर चल रहा होगा जादू, आसमान पर चला करके दिखाएं कुछ। हुज़ूर ने इशारा किया और चांद दो टुकड़े हो गया। सुभान अल्लाह। उसका इंकार करना था, मेरे आका ने इज़हार करके दिखाया। दुश्मनों का कभी कभार होना आपके कमालात के इज़हार का सबब बनता है।