Ulama Ki Zimmedari Aur - हक पर कायम रहना

Nasir Husain
Nasir Husain

Science Aur Daur-e-Hazir Ke Gumrah Kun Fitne

हत्ता कि मैं देख रहा था। एक इंटरव्यू को हैरत होती है आपके पास बहुत सारी चीजें आती हैं साइंस प्रूवन है साइंस प्रूवन है क्या है मतलब। कुछ खाने पीने की चीजें आपके पास आ रही हैं ये खाओ ये डाइट बहुत मतलब बहुत ही उम्दा है और साइंस प्रूवन है साइंस ने इसका सब सर्च किया है और सारी चीजें इस पर सर्वे हुआ है और बड़े बड़े साइंटिस्ट ने इस पर मुहर लगाई है। तो अवाम उसको हाथों हाथ ले रही है। अरे साइंस प्रूवन है ये। साइंटिफिक एतबार से भी इसके हेल्थ के बेनिफिट हैं मैं देख रहा था कई साइंसदानों को तो हुकूमत खरीद कर रखी हुई है बड़े बड़े पैसे वाले लोग इनको खरीद कर के रखे हुए हैं अरे चाहे कुछ भी कचरा हो तुम कह दो कि मैंने रिसर्च किया है मैंने सर्वे किया है डेढ़ लाख लोगों पर और उसका असर ये आया है और इसके बदले में तुम जितना पैसा ले... ले लो। साइंसदान को पैसे दिए गए और उसने एक बात कह दी। कि ये साइंस प्रूवन है लाखों की तादाद में लोग हाथों हाथ खरीद रहे हैं। अरे बाज़ार पर भी असर है इनका तुम्हें कचरा भी खिलाना हो तो कल को ये कह दिया जा सकता है साइंस प्रूवन है क्योंकि जाहिल हैं कुछ भी... तो साइंसदानों के ज़रिए से अगर मार्केट पर काबू पाया जा सकता है तो उलमा के ज़रिए से क्यों नहीं पाया जाता। जिनकी आस्था लगी हुई है ताल्लुक लगा हुआ है 



Ulama Ki Zimmedari Aur Siyasat Ka Khel

तो मेरे अज़ीज़ो आखिरी बात कहता हूं मुझे ये बात। उस वक्त पता चली। जब मैं लोगों से राब्ते में नहीं था आप समझ सकते होंगे कुछ ऐसे उलमा के चेहरे सामने आए अल्लाहु अकबर जो महाना तनख्वाह लेते हैं महाना तनख्वाह लेते हैं। सिर्फ और सिर्फ बड़ी ताकत के हिसाब से लिखने पर और बोलने पर और क़ौम की मुखबिरी करने पर। नामवर लोग हैं। पढ़े लिखे लोग हैं तनख्वाह मिलती है। बड़े बड़े ताकतों से पैसे लेते हैं और सामने हमारे चेहरे आए ज़मीन के नीचे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाए कि ये तो इतने अच्छे चेहरे दिखे जाते हैं। हां इसीलिए मेरे अज़ीज़ो। कि इनके कलम से इनकी जुबान से लोगों पर वही चीज डाली जाए जो हुकूमत चाहती है।

Nasbandi Ka Daur Aur Aala Hazrat Ke Shehzade Ka Fatwa

आपको पता है इंदिरा गांधी के ज़माने में नसबंदी करने का फैसला कर लिया गया था पॉपुलेशन कंट्रोल करने के लिए कि मर्दों को भी जो है ना नसबंदी करा दी जाए यानी इनको बच्चे पैदा होने की सलाहियत खत्म कर दी जाए लेकिन इसमें मेन मसला आता था मुसलमानों का मुसलमानों के यहां हराम है नहीं मानेंगे। तो क्या किया जाए मुसलमान मानेंगे तो किसी हुकूमत की थोड़ी ना मानेंगे यहां जितने भी डॉक्टर इनको बता दें ये फायदे हैं वो फायदे तो भी नहीं मानेंगे। एक बड़ा तबका है जो अपने दीन पर कायम है और दीन को मनवाने के लिए तो उलमा चाहिए। तो सीधे मदरसे गए बड़े बड़े मदरसों में और फतवा लिया वहां से। फतवा लिया बड़े बड़े मदरसों से कि हां हुकूमते वक्त के हालात के एतबार से जायज़ है बंद करा सकता है आदमी। कई उलमा फतवा दे चुके। लेकिन उसके बाद भी हिन्दुस्तान पर असर नहीं हो रहा था क्योंकि हुकूमत ने देखा था कि इनके ऊपर ज्यादा असर बरेली का है। सुभानल्लाह। तो बरेली पहुंचे लेकिन बरेली में कोई ऐरा गैरा नहीं बैठा था आला हज़रत का शहज़ादा बैठा हुआ था। हुजूर मुफ्ती-ए-आज़म-ए-हिंद रदियल्लाहु ताआला अन्हु जो मुत्तकी परहेज़गार आलिमे दीन मुत्तकी बन कर दिखाए इस ज़माने में कोई एक मेरे मुफ्ती-ए-आज़म का तकवा छोड़ कर। मेरे अज़ीज़ो उनके पास जब ये सवाल गया तो आपने जो जवाब दिया वो मौजूद है एक बार नहीं कहा उन्होंने पूरे दलाइल के साथ लिखकर नीचे लिखा नसबंदी हराम है हराम है हराम है। और जो मेरे मुस्तफ़ा ने हराम किया वो कयामत तक हराम है




Jab Hukumat Ke Faisle Deen Se Takraye

अब ये निकला हुकूमत को पता चला कि एक मौलवी से पूरा मसला खराब हो सकता है क्या किया जाए छपने से बंद कर दिया जाए लेकिन जो चीज अल्लाह पहुंचाना चाहता है वो किसी के बंद करने से कभी नहीं रुकता कभी नहीं रुकता। प्रेस को जला दिया गया था बरेली शरीफ में जिस जगह से ये फतवा शाया हुआ प्रिंटिंग प्रेस प्रेस जला दिया गया प्रेस के मालिकान को कब्जे में लिया गया गिरफ्तार किया गया और जो दीवारों पे जा कर फतवा चिपका रहे हैं पुलिस पकड़ पकड़ कर ले जा रही है कहां रुकने वाली चीज कहां है। पूरे हिन्दुस्तान में आग की तरह बात फैल गई कि आला हज़रत के शहज़ादे ने फतवा दिया है कि नसबंदी हराम है सब मिल कर के एक तरफा ऐलान किए हम हुकूमत के इस फैसले को नहीं मानते ये हमारे दीन का हिस्सा है। थोड़े दिन हुआ मुसलमानों को तकलीफें आईं उलमा गिरफ्तार हुए लेकिन चंद ही दिनों के बाद खबर आई कि लेडी खुद तख्त से उतर गई हुकूमत ही गिर गई तो मेरे अज़ीज़ो एक बात याद रखो ताकत और पावर के ज़रिए से पूरी दुनिया पर असर कायम किया जाता है आज अमेरिका की बोली बोलने वाले लोग भी बहुत सारे होंगे वो जो कर रहा है वो सही है इस्राइल की बोली बोलने वाले लोग होंगे क्योंकि थोड़ा सा उनके यहां से गोबर मिल जाएगा हां यहां पर भी बहुत सारे हुए हैं बहुत सारे। ये जो कर रहे हैं मस्जिदें तोड़ें खानकाहें तोड़ें माबदें तोड़ें इससे कोई बात नहीं अरे लेकिन हैं तो अच्छे लोग हैं। उनकी जमात के भी कुछ हैं टोपी भी पहनेंगे दाढ़ी भी पहनेंगे इनका वो ईमान है जो माल है।

Sheikh Mohiuddin Ibn-e-Arabi Ka Waqia: Tumhara Khuda Pairo Ke Neeche Hai

इसीलिए शेख मोहिउद्दीन इब्ने अरबी की वो बात मुझे याद आती है आप कुर्सी पर बैठे हुए थे कुछ लोग आए मिलने के लिए आपके सामने बैठे थे आपने बयान करते करते अचानक कहा तुम्हारा खुदा मेरे पैरों के नीचे रहता है लोगों से इतना कहा तो लोग भड़क गए इतने बड़े आलिमे दीन इतने बड़े सूफी और कुफ्र का फतवा लगा कर निकल गए कि ये तो काफिर हो गया दो लोग बैठे रह गए उन्होंने पूछा हुजूर आपके ऊपर कोई चीज आ गई आपने ऐसा जुमला क्यों कहा खुदा पैरों के नीचे रहता है ये तो बहुत बड़ा गिरा हुआ जुमला है। आपने कहा सबर वो भी मुझे पूछ सकते थे लेकिन वो इसलिए आए ही नहीं थे मैं जानता हूं उन लोगों को मैंने क्यों कहा वो बताता हूं। उसके बाद आपने अपने पैरों के नीचे से चटाई उठाई तो देखा सोने के चांदी के सिक्के पड़े हुए थे कहा यही इनका खुदा है। वो इसकी इबादत करते हैं मैंने ये नहीं कहा कि मेरा खुदा पैरों के नीचे है मैंने कहा तुम्हारा खुदा मेरे पैरों के नीचे है ऐसे जमात हर ज़माने में होगी जिनका खुदा माल है जिनका खुदा पैसा है कुरआन में भी अल्लाह ने फरमाया अरअइत मनित्तखज इलाहहु हवाहु ऐ रसूल क्या आपने नहीं देखा कुछ वो लोग हैं जिन्होंने अपनी ख्वाहिसात को अपना खुदा बनाया हुआ है। अल्लाह ताआला फरमाता है क्या आप ऐसे लोगों की वकालत करेंगे क्या आप ऐसे लोगों की सिफारिश करेंगे ये वो लोग हैं अल्लाह फरमाता है इन हुम इल्ला कल अन्आमि बल हुम अज़ल ये तो जानवरों से भी ज्यादा गुमराह लोग हैं। अल्लाह फरमाता है जानवरों से भी ज्यादा गुमराह हैं।

Aane Wale Daur Ke Fitne Aur Hamara Imaan
बस मुझे फिक्र है इसलिए मैंने ये सारी बातें कीं कि अल्लाह हमारे ईमान की हिफाजत करे आने वाला जो दौर है हुकूमत जिसकी होगी पावर जिसका होगा ताकत जिसकी होगी लोग उसकी बोली बोलने लग जाएंगे मिडिल ईस्ट के जो असरात हैं आज मिडिल ईस्ट में जो जंगें जारी हैं ये अगर इस मोड़ पर चली जाती हैं किसी और क़ौम का दबदबा आता है तो मुसलमानों के अक़ीदे पर भी असर कर सकता है। आगे चल कर के हजारों लोग आने वाली नई हुकूमत के बुलबुले हो जाएंगे उनके मुरीद हो जाएंगे वो कहेंगे कि ये देखो ये हक़ जमात है ये आ गई ये हक़ जमात है इसको अल्लाह ने ताकत दी और ये पावर पर आ गए मेरे अज़ीज़ो ये सारी चीजें कौन आता है कौन जाता है इससे सरोकार नहीं एक बात ये देखो मेरे नबी का अगर गुलाम है तो वो चटाई पर बैठा भी हो तो मेरा इमाम है और नहीं है तो उससे मेरा कोई ताल्लुक नहीं।




Haq Par Qayam Raho: Duniya Ki Taqat Se Mat Daro

माल और पैसा और ताकत और हुकूमत और सियासत तुम्हारे दीन को बदलने में असर ना करे इतना ईमान पैदा करो और ये कब होगा जब तुम क़दमे मुस्तफ़ा से लगे रहोगे दुनिया की ताकतें आएंगी जाएंगी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ेंगी इसीलिए आला हज़रत फाज़िले बरेलवी के इस बात पर अमल करके जाओ इंशाअल्लाह हर ज़माने में महफूज़ रहोगे उन्हें जाना उन्हें माना ना रखा गैर से काम लिल्लाहिल हम्द मैं दुनिया से मुसलमान गया। व आखिरू दा'वाना अनिल हम्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन अस्सलामु अलैकुम।

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✍️ Written By: Nasir Husain

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